Kutumb — Your Greatest Asset!
आदिकाल से मानव समाज को संस्कारित और संगठित रखने वाली सबसे सशक्त धुरी यदि कोई रही है, तो वह हमारी भारतीय कुटुंब व्यवस्था है। कुटुंब केवल रक्त-संबंधों से जुड़े कुछ व्यक्तियों का समूह या चारदीवारी का नाम नहीं है।
आदिकाल से मानव समाज को संस्कारित और संगठित रखने वाली सबसे सशक्त धुरी यदि कोई रही है, तो वह हमारी भारतीय कुटुंब व्यवस्था है। कुटुंब केवल रक्त-संबंधों से जुड़े कुछ व्यक्तियों का समूह या चारदीवारी का नाम नहीं है।
आप सभी को सादर प्रणाम। आज समाज के सामने एक सीधा और कड़वा प्रश्न उपस्थित है: चारों ओर दिन-रात राम-नाम का जयघोष हो रहा है, फिर भी हमारे समाज में दुराचार, व्यभिचार और अराजकता अपनी चरम सीमा पर क्यों
आज हम मानव इतिहास के एक ऐसे भयानक और आत्मघाती दौर से गुजर रहे हैं, जहाँ 'आज़ादी' शब्द का अर्थ ही पूरी तरह विकृत कर दिया गया है। जिसे आज व्यक्तिगत स्वतंत्रता, आधुनिकता और प्रगतिशीलता के नाम पर थाली
हज़ारों वर्ष पूर्व जब इस पावन धरा पर हमारी सभ्यता का बीजारोपण हुआ, तब संस्कृति का विस्तार केवल नगरों की सीमाओं तक सीमित नहीं था। उसकी असली जड़ें उन शांत, सघन और सुरम्य वनों में गहराई से रची-बसी थीं,
हम अक्सर समाज की दुर्दशा, नैतिक पतन और व्यवस्था की विफलता का सारा ठीकरा राजनीति और नेतृत्व पर फोड़कर खुद को दोषमुक्त मान लेते हैं। प्राचीन समय में कहा जाता था "यथा राजा तथा प्रजा" (जैसा शासक होगा, वैसी
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